राज्यपाल ने जवाबी चिट्ठी में भाषा की सभ्यता और संवैधानिक पदों के सम्मान की नसीहत दी

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राज्यपाल राम नाईक ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर की ओर से 2 नवंबर को लिखी गई चिट्ठी की भाषा पर कड़े सवाल उठाए हैं। राजबब्बर ने इस चिट्ठी में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने के साथ ही राज्यपालपर भी मजबूरी और चुप्पी के आरोप लगाए थे। रविवार को जवाबी चिट्ठी में राम नाईक ने उन्हें भाषा की सभ्यताऔर संवैधानिक पदों के सम्मान की नसीहत दे डाली है। राज्यपाल ने कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा है कि संवैधानिक पदों का सम्मान लोकतंत्र की पहचान होती है। मैं अपने विचार सभ्य भाषा में रखता हूं। राज्यपाल ने राजबब्बर को सपरिवार दीपावली की शुभकामनाएं दी हैं। साथ ही अपने पत्र को मीडिया में जारी करने की वजह भी बताई है। उन्होंने लिखा है कि चूंकि आपने पत्र प्रसार माध्यमों को भेजा था इसलिए मैं भी इस पत्र की प्रति प्रसार माध्यमों से उपलब्ध करा रहा हूं। ‘मैं लगातार ये समझने की कोशिश कर रहा हूं कि आपको आखिरकार किसने शिथिल कर रखा है। विपक्ष के लिए ये चिंता की बात है कि महामहिम राज्यपाल की आखिर कैसी मजबूरी कि वो चुप हैं। राजभवन जीवंत और स्पंदनशील संस्थान है जिसकी सक्रियता यूपी की जनता ने हमेशा महसूस किया है। लेकिन आजकल राजभवन की वाणी पर विराम को भी महसूस किया जा रहा है।’ ‘राजनीति में संवैधानिक पदों का सम्मान लोकतंत्र की पहचान होती है। आप की भाषा सर्वथा उचित नहीं है, इसका मुझे खेद है। यह बात बिलकुल सही नहीं है कि मेरी कोई मजबूरी है, मैं चुप हूं या किसी ने राजभवन की वाणी पर विराम नहीं लगाया है। राज्यपाल पद पर मुझे 4 वर्ष 3 महीने पूरे हो गए हैं। आप वृत्तपत्र पढ़ते ही होंगे, मेरी वाणी पर कोई विराम देखने के लिए नहीं मिलेगा। हां, यह जरूर है कि मैं राज्यपाल की गरिमा के अनुरूप बोलता हूं। सभ्य भाषा में अपने विचार रखता हूं, न कि आप की शैली में।’ राजबब्बर ने पत्र में प्रदेश को कानून व्यवस्था को विफल बताया था। इस पर राज्यपाल ने जवाब में लिखा है ‘कानून व्यवस्था के बारे में आपका लिखा पत्र मैंने तीन बार पढ़ा। इस पर मुख्यमंत्री से आवश्यकतानुसार मेरी चर्चा होती रहती है। सरकार भी संवेदनशील है और निरंतर जागरूकता से काम कर रही है। आपने जो मुद्दे उठाएं हैं, उन पर उचित कदम उठाया जाए इसलिए आपका पत्र मुख्यमंत्री को प्रेषित कर रहा हूं।’ राज बब्बर ने कहा, ‘मैं राज्यपाल और राजभवन दोनों का सम्मान करता हूं। राज्यपाल हमारे अभिभावक हैं। जिन्हें अपना अभिभावक मानते हैं, उन्हीं से शिकायत भी की जाती है। अगर उन्हें कोई बात खराब लगी तो मैं उनसे उचित समय पर अपनी बात स्पष्ट कर दूंगा। हालांकि मुझे राज्यपाल द्वारा भेजी गई चिट्ठी अभी नहीं मिली है।’

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