जम्मू और कश्मीर में 65 वर्षीय महिला ने दिया बच्‍ची को जन्‍म ! हैरान रह गए डॉक्टर

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नगर के राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल में हाल ही में शाम 65 वर्षीय महिला ने बच्ची की जन्म दिया। बच्ची स्वस्थ है। जम्‍मू-कश्‍मीर में इस तरह का यह पहला मामला है। सामान्‍य तौर पर ऐसा संभव नहीं हो सकता और यह माना जाता है कि महिलाओं की 50 वर्ष की आयु के आसपास मीनोपाज हो जाता है। उसके बाद गर्भ धारण की संभावना नहीं रहती। चिकित्‍सक भी इससे हैरान हैं जबकि नवजात कन्‍या के 80 वर्षीय पिता इसे खुदा का आशीर्वाद बता रहे हैं।पुंछ की सूरनकोट तहसील में मुगलरोड के किनारे बसे सैलां गांव निवासी 80 वर्षीय हाकिम दीन की 65 वर्षीय पत्‍नी को प्रसव पीड़ा होने पर सुबह जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां महिला रोग विशेषज्ञ डा. शहनाज बट्टी की देखरेख में उसने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। हाकिम दीन ने इसे ऊपर वाले का एक अनमोल तोहफा बताया। हालांकि इस उम्र में उन्‍हें बच्‍ची के लालन-पालन की भी चिंता हो रही है।उन्होंने प्रशासन से मांग की कि वह उन्हें सहायता मुहैया करवाए, ताकि बच्ची का सही प्रकार पालन पोषण कर सके। दंपती का एक बच्‍चा पहले से ही है और वह इस समय आठ से 10 वर्ष के बीच बताया जा रहा है। महिला रोग विशेषज्ञ डा: बट्टी ने बताया कि महिला को लेबर पेन के बाद जिला अस्‍पताल में भर्ती कराया था और उसकी सामान्‍य डिलीवरी हुई है।अस्‍पताल के सीएमओ डा. मुमताज बट्टी और जिला अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट डा. गुलाम अहमद मलिक ने बताया भी इस बाद की तस्‍दीक करते हैं कि महिला ने अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया है और उसकी आयु 65 साल बताई गई है। हालांकि, वे यह दावे से नहीं कह सकते कि यह उसकी सही उम्र है। उसके पास कोई आयु प्रमाण पत्र नहीं है। उनके मुताबिक महिला की आयु 55 से 58 वर्ष के बीच हो सकती है।इस संदर्भ में कई चिकित्‍सकों से बात की गई लेकिन वह यह स्‍वीकार करने को तैयार नहीं हैं कि इस उम्र में सामान्‍य डिलीवरी हो सकती है। वह यह मानते हैं इस उम्र के आसपास कुछ महिलाओं ने आइवीएफ तकनीक से बच्‍चे को जम्‍न दिया है और उनके बच्‍चे स्‍वस्‍थ भी हैं। यह संभव नहीं है कि सामान्‍य डिलीवरी इस उम्र में संभव हो। हालांकि 80 वर्षीय हाकिम दीन यह स्‍वयंबता रहे हैं कि डिलीवरी सामान्‍य है।महिला रोग विशेषज्ञ डा: नरेंद्र शर्मा बताते हैं कि 65 की उम्र में सामान्‍य डिलीवरी संभव नहीं है। यदि पुंछ में इस महिला की सामान्‍य डिलीवरी हुई है तो यह हैरानी की बात है। आम तौर पर 45 वर्ष की आयु सीमा लांघते ही मासिक धर्म बंद हो जाता है। कुछ महिलाओं में यह 52 साल की उम्र तक भी हुआ है। इससे अधिक आयु में मां बनना केवल आइवीएफ से ही संभव है।हरियाणा व पंजाब में आइवीएफ तकनीक से कुछ महिलाएं 70 साल की आयु में भी मां बन पाई। अमृतसर की दलजिंदर कौर तो आइवीएफ तकनीक से 72 साल की उम्र में मां बन सकी। आइवीएफ तकनीक का पूरा नाम इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन है , यह एक सहायक प्रजनन तकनीक है। इस तकनीक से बच्चा पैदा करने से असमर्थ महिलाओं को गैर कुदरती तरीके से गर्भवती करवाया जाता है। इस प्रक्रिया में महिला के गर्भाशय से अंडा निकाला जाता है और फिर इसे पुरुष के शुक्राणु से निषेचित कर दिया जाता है।फिर इस भ्रूण को बढ़ने व विकसित करने के लिए महिला के गर्भाशय में ट्रांसप्‍लांट कर दिया जाता है। हालांकि चिकित्‍सक 50 वर्ष से अधिक आयु में आइवीएफ के खिलाफ हैं क्‍यो‍ंकि इससे म‍हिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही बच्‍चों में कई तरह के आनुवांशिक रोग की आशंका बढ़ जाती है।

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