जानें धनतेरस पर क्यों होती है धन्वंतरि देव की पूजा।

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कैलेंडर के हिसाब से इस समय कार्तिक का महीना चल रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 5 नवंबर, सोमवार को धनतेरस का त्योहार है। सनातन धर्म को माननेवाले लोग इस दिन शुद्ध धातु जैसे, सोना, चांदी, तांबा और कांसा खरीदते हैं और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इस दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरि का भी जन्मदिन मनाया जाता है। आयुर्वेद संसार की सबसे पुरानी शिक्षा पद्धति है। अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य कहे जाते हैं और मान्यता है कि अश्विनी कुमार इस विधि से ही सभी के कष्ट दूर करते हैं। संसार में आयुर्वेद के प्रसार के लिए समुद्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरि प्रकट हुए थे। धनवंतरि जी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। धार्मिक आस्था है कि जिस समय समुद्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरि प्रकट हुए, उस दिन कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि थी। इसीलिए इस तिथि को भगवान धनवंतरि की पूजा कर आरोग्य और स्वास्थ्य धन की प्रार्थना की जाती है। हमारे समाज में एक कहावत प्रचलित है- ‘पहला सुख निरोगी काया’ अर्थात दुनिया का पहला सुख एक स्वस्थ शरीर है। इसी कामना के साथ भगवान धनवंतरि की पूजा की जाती है। भगवान धनवंतरि चार भुजाधारी हैं। इनके एक हाथ में आयुर्वेद ग्रंथ, एक हाथ में औषधि कलश, एक हाथ में जड़ी बूटी और एक हाथ में शंख होता है। ये प्राणियों पर कृपा कर उन्हें आरोग्य प्रदान करते हैं। इसलिए धनतेरस पर केवल धन प्राप्ति की कामना के लिए पूजा न करें, स्वास्थ्य धन प्राप्ति के लिए भगवान धनवंतरि की पूजा भी करें।

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