‘राफेल’ पर CAG रिपोर्ट पेश करेगी सरकार, अब होगा दूध का दूध पानी का पानी

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फ्रांस के साथ हुए राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर पिछले कुछ महीनों से केंद्र और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है, तो वहीं सरकार सभी आरोपों को खारिज करती आई है। ऐसे में खबर आ रही है कि केंद्र सरकार राफेल से जुड़ी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट बजट सत्र में संसद के पटल पर रख सकती है। सरकार पहले ही रक्षा सौदे से जुड़े में कैग के प्रश्नों का जवाब दे चुकी है। इससे पहले सूचना के अधिकार कानून के तहत राफेल विमान सौदे को लेकर कैग की अंकेक्षण का ब्योरा मांगा गया था। लेकिन कैग ने तब यह जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा था कि अभी इस मामले में ऑडिट की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और संसद के समक्ष इस रिपोर्ट के रखे जाने से पहले इसकी जानकारी देना विशेषाधिकार का हनन होगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में राफेल डील में कथित गड़बड़ी की जांच को लेकर कई याचिकाएं दायर हुई थी। जिसे खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा था कि विमान के सौदे में प्रक्रिया का सही तरीके से पालन हुआ है, लिहाजा इसमें जांच की आवश्यकता नहीं। हालांकि कोर्ट ने अपने आदेश मे की गई एक टिप्पणी में कहा कि राफेल की प्राइस डिटेल कैग के साथ साझा की गई है और कैग की रिपोर्ट को संसद की लोक लेखा समिति (पाएसी) ने जांचा भी है। रिपोर्ट का केवल एक हिस्सा संसद के समक्ष रखा गया और वह पब्लिक डोमेन में है। सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संसद में कांग्रेस संसदीय दल के नेता और पीएसी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि कोर्ट के आदेश में कैग की जिस रिपोर्ट का जिक्र किया गया था, वो तो पीएसी में आई ही थी। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया था। हालांकि बाद में सरकार की तरफ से कोर्ट के आदेश मे कैग रिपोर्ट के संबंध में की गई टिप्पणी में सुधार के लिए अपील की गई। सरकार की तरफ से कहा गया कि उसने ऐसा नहीं कहा कि कैग रिपोर्ट की जांच पीएसी ने की या इसका एक अंश संसद के समक्ष रखा गया। सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि नोट में कहा गया था कि सरकार कैग के साथ पहले ही प्राइस डीटेल्स शेयर कर चुकी है।

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