राफेल डील पर फ्रांस के राजदूत : लोगों को तथ्य देखना चाहिए, ट्वीट्स नहीं

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राफेल डील को लेकर फ्रांस के राजदूत एलेक्जेंडर जीग्लर ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी पार्टी पर निशाना साधा। जीग्लर ने कहा कि लोगों को तथ्यों पर विश्वास करना चाहिए, ना कि ट्वीट्स पर। राफेल डील को लेकर राहुल गांधी अपने ट्वीट्स और चुनावी जनसभाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं।दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान जब जीग्लर से राफेल डील को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं बहुत ही कम शब्दों और सीधे तरीके से जवाब देता हूं- लोगों को तथ्यों को देखना चाहिए, ट्वीट्स को नहीं।राफेल बनाने वाली कंपनी दैसो के सीईओ एरिक ट्रेपिए डील में गड़बड़ी के आरोपों को पहले ही नकार चुके हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में ट्रेपिए ने कहा था कि रिलायंस डिफेंस को दैसो ने खुद ही पार्टनर चुना। उन्होंने बताया था कि रिलायंस के अलावा हमारे 30 दूसरे पार्टनर भी हैं।राहुल ने आरोप लगाया था कि राफेल सौदे के लिए दैसो और रिलायंस के ज्वाइंट वेंचर के बारे में ट्रेपिए ने झूठ बोला था। राहुल ने कहा था, “मोदी सरकार ने पक्षपात कर अनिल अंबानी की घाटे में चल रही कंपनी को राफेल डील दिलवाई। उन्होंने कंपनी पर मोदी सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप भी लगाया था।” ट्रेपिए ने इन आरोपों पर दुख जताते हुए कहा था कि उनकी कंपनी किसी पार्टी के लिए काम नहीं करती।भारत-फ्रांस सरकार के बीच सितंबर 2016 में राफेल डील हुई थी। इसके तहत फ्रांस भारत को 36 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान देगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सौदा 7.8 करोड़ यूरो (करीब 58 हजार करोड़ रु.) का है। पहला राफेल सितंबर 2019 में मिलेगा।

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