श्रीलंकाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री के रूप में राजपक्षे के अधिकार पर लगाई रोक

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श्रीलंका में जारी राजनीतिक संकट के बीच सोमवार को यहां की एक अदालत ने महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री के तौर पर काम करने से रोक दिया। यह कदम राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के लिए बड़ा झटका है जिन्होंने एक विवादित फैसले के तहत रानिल विक्रमसिंघे के स्थान पर राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। अदालत ने राजपक्षे और उनकी कैबिनेट को पद की हैसियत से काम करने से रोक दिया। विवादित सरकार के खिलाफ 122 सांसदों की ओर से दायर याचिका के जवाब में आदेश पारित किया गया है। अदालत ने सुनवाई की तारीख 12 और 13 दिसम्बर तय की है। सुनवाई में मौजूद एक वकील ने कहा कि अंतरिम राहत के मुताबिक राजपक्षे और उनकी विवादित सरकार को प्रधानमंत्रीकैबिनेट और उपमंत्रियों के तौर पर काम करने से रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि अदालत का मानना था कि प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्री के पद पर काबिज व्यक्ति अगर ऐसा करने के अधिकारी नहीं हैं तो इससे बड़ा नुकसान हो सकता है। राजपक्षे के प्रधानमंत्री बनने के खिलाफ विक्रमसिंघे की यूनाईटेड नेशनल पार्टीजनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपीऔर तमिल नेशनल अलायंस ने पिछले महीने अपीलीय अदालत में याचिका दायर की थी। श्रीलंका में 26 अक्टूबर से राजनीतिक संकट चल रहा है जब राष्ट्रपति सिरिसेना ने विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया था और उनकी जगह राजपक्षे को नियुक्त कर दिया था। सिरिसेना ने बाद में संसद का कार्यकाल खत्म होने से करीब 20 महीने पहले ही उसे भंग कर दिया और चुनाव कराने के आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने संसद भंग करने के सिरिसेना के फैसले को पलट दिया और मध्यावधि चुनावों की तैयारियों पर रोक लगा दी थी। विक्रमसिंघे और राजपक्षे दोनों प्रधानमंत्री होने का दावा करते हैं। विक्रमसिंघे का कहना है कि उनकी बर्खास्तगी अवैध है क्योंकि 225 सदस्यीय संसद में उनके पास बहुमत है। राजनीतिक संकट की वजह से पिछले एक महीने से ज्यादा समय से सरकार पंगु हो गई है।

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